Saral Hindi Paheliyan with Answers

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बिना हाथ पैर के…. चल के न तैर के… सबके घर चली जाऊ…. बिना किसी बैर के।

पत्र 

तीन आखर का मेरा नाम
पहला हटे तो राम-राम,
जे काटे दूजा तो आए फल का नाम,
तीसरा कटे तो काटने का काम।

आराम
सोने को पलग नहीं,
न ही महल बनाए ,
एक रूपया पास न,
फिर भी राजा कहलाए।
उछाले दौड़े कूदे दिनभर
यह दिखने मे बढ़ा ही सूंदर
लेकिन नहीं ये भालू बंदर
अपनी धून मे मस्त कलंदर
इसके नाम मे जुड़ा है रन
घर है इसके सूंदर वन।
अचरज बंगला एक बनाया, बॉस न बल्ला बंधन धने।
ऊपर नींव तारे घर छाया, कहे खुशरो घर कैसे बने।
चार खड़े, दो अड़े, दो पड़े….
एक-एक के मुँह मे दो-दो पड़े।
मैं हूँ हरी, मेरे बच्चे काले….
मुझे छोड़, मेरे बच्चे काले ।
माटी रौंदू चक धरु, फेरु बरम्वार।
चतुर हो तो जान ले मेरी जान गवार।

बाल नीचे कपड़े फ़टे मोती लिए उतार।

यह बिपदा कैसी बनी जो नंगी कर दई नार।

 बुट्टा (छल्ली )

एक पेड़  की तीस है डाली,
आधी सफेद  और आधी काली|

 महीना

रात गली में खड़ा -खड़ा ,
डंडा लेकर बड़ा -बड़ा |
रहो  जागते होशियार ,
कहता वो बार -बार |

 चोकीदार

चार अक्षर का है मेरा नाम.गहरी छाया,

फल देना काम.पर्तों से कीड़े है पलते।

कीड़ो से हम कपडा बुनते।

 शहतूत

एक थाल मोतियों से भरा सबके सर पर उलटा धरा,

चारों ओर फिरे वो थाल मोती उससे एक ना गिरे।

 तारे

ऐसा एक अजब खजाना, जिसका मालिक बड़ा स्याना,

दोनों हाथों से लुटाता, फिर भी दौलत बढती जाये !! बताओ क्या ?

 गोलगप्पे की दुकान

चार पाँव पर चल न पाए,

चलते को भी वह बैठाए।

 मेहदी 

चल पड़ती तो चल जाती,

बिना सहारे ठहर न पाती।

 कुर्सी

छोटे से मिया जी, दाढ़ी सौ गज की।

 ताला

एक घर में राजा सोए, दूसरे में पाँव पसारे।

ढोलक 

ऐसी कौन सी जगह है जहाँ अगर 100 लोग जाते हैं तो 101 लोग वापस आते हैं?

 बारात

कपड़े उतरवाएँ पंखा चलवाए कहती ठंडा पीने को
अभी-अभी तो नहा के आया फिर से कहती नहाने को।

 गर्मी

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